वसंत ऋतु (The Spring Season)
“मन्द-मन्द हवा चली, विहुँस उठी कली-कली भौरे बोराए, ऋतुराज आए।” विषय-प्रवेश : ऋतुएँ तो अनेक हैं लेकिन वसंत की सज-धज निराली है। इसीलिए वह ऋतुओं का राजा, शायरों-कवियों का … Read more
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“मन्द-मन्द हवा चली, विहुँस उठी कली-कली भौरे बोराए, ऋतुराज आए।” विषय-प्रवेश : ऋतुएँ तो अनेक हैं लेकिन वसंत की सज-धज निराली है। इसीलिए वह ऋतुओं का राजा, शायरों-कवियों का … Read more
भूमिका: वर्षा ऋतु ही धरती का धन धन और प्राणियों का जीवन है, यही कारण है कि लोगों ने यदि वसन्त को ऋतुओं को राजा कहा है, तो वर्षा ऋतुओं की रानी कहलाती है। दिनकर के शब्दों में-राजा बसन्त, वर्षा ऋतुओं की रानी। ऋतुओं की रानी : जेठ के उत्ताप से धरती झुलसने लगती है, … Read more
भूमिका : किसी भी राष्ट्र की उन्नति का एक मूल मंत्र है-राष्ट्रीय एकता। जिस राष्ट्र में एकता है वहाँ समृद्धि है, शांति है। जहाँ एकता नहीं है वहाँ गरीबी है, गुलामी है। राष्ट्रीय एकता का महत्त्व : अपना देश भारत एक विशाल देश है। यहाँ हिन्दू हैं, मुसलमान हैं, सिक्ख हैं, ईसाई हैं। अनेक धर्म … Read more
भूमिका : अनादि काल से नशीले पदाथों का सेवन किया जाता रहा है। कहते हैं कि देवता भी सोमरस पिया करते थे। लेकिन आज की युवा पीढ़ी यह समझने के लिए तैयार नहीं है कि तब वह शक्तिवर्धक के रूप में ग्रहण किया जाता था। अनेक प्रकार की प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ भी है जो नशा प्रदान … Read more
प्रस्तावना: सत्य एवं अहिंसा के पुजारी, त्याग एवं सहनशीलता की मूर्ति महात्मा गाँधी विश्व की महान् विभूति थे, जिन्हें संसार कभी भी भूल नहीं सकता। पीड़ितों एवं दलितों के उद्धारक महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात प्रांत के काठियावाड़ के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी … Read more
भूमिका: भारत में नारी को देवी के रूप में देखा जाता है। नारी का हृदय धरा समान होता है। अनेक कष्ट सहकर भी वह पुरुष को कष्ट नहीं होने देती है। प्राचीन काल में अनुसूया, लीलावती, मैत्रयी, अत्री, गार्गी आदि नारियों के अस्तित्व को देखते हुए कहा जा सकता है कि वेदिक युग में हमारे … Read more
भूमिका : बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने अपने चुनाव अभियान में शराबबंदी लागू करने का वादा किया था और इस मुद्दे पर उन्हें काफी जन-समर्थन, खासकर महिला वोटरों के बीच मिला था। सरकार बनाने के बाद अब नीतिश कुमार ने अपना वादा पूरी तरह निभा दिया है। एक अप्रैल से बिहार में देशी शराब … Read more
विषय-प्रवेश : सबकी अपनी-अपनी रुचि होती है। किसी को सिनेमा या नाटक का शौक होता है तो किसी को कुश्ती का। इसी प्रकार, कोई क्रिकेट खेलना चाहता है तो कोई हॉकी या टेनिस का दीवाना होता है। जहाँ तक मेरा सवाल है, मुझे तो खेल ही पसन्द है और वह भी फुटबॉल का खेल। खेल-संसार … Read more
भूमिका : “मैं नरक में भी रहूँगा, पुस्तकों का स्वागत करूंगा, क्योंकि इसमें वह शक्ति है कि जहाँ ये होंगी वहाँ अपने-आप ही स्वर्ग बन जाएगा।” लोकमान्य तिलक की पंक्तियाँ साबित कर देती हैं कि मानव जीवन में पुस्तकों का कितना बड़ा योगदान है। पुस्तकों से ज्यादा सच्ची मित्र कोई हो ही नहीं सकता। गुरु … Read more
भूमिका : मनुष्य प्रकृति की सर्वोत्तम सृष्टि है। जब तक यह प्रकृति के कामों में बाधा नहीं डालता, तब तक इसका जीवन स्वाभाविक गति से चलता है। किन्तु, इधर औद्योगिक विकास के लिए इसने प्रकृति से अपना ताल-मेल समाप्त कर लिया है। नतीजा यह है कि जितनी ही तेजी से उद्योग बढ़ रहे हैं, प्रकृति … Read more