सरस्वती पूजा : बसंत पंचमी (Saraswati Puja – Basant Panchami)
“देव-पद के अभिलाषी सरस्वती का आवाहन करते हैं।” – ऋग्वेद विषय-प्रवेश : ज्ञान और संगीत मानव विकास के मूल हैं। अपने देश में अनादि काल से ज्ञान और संगीत की देवी के रूप में … Read more
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“देव-पद के अभिलाषी सरस्वती का आवाहन करते हैं।” – ऋग्वेद विषय-प्रवेश : ज्ञान और संगीत मानव विकास के मूल हैं। अपने देश में अनादि काल से ज्ञान और संगीत की देवी के रूप में … Read more
समाचार पत्र संसार के दर्पण हैं। भुमिका : मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जैसे-जैसे उसकी सामाजिकता में विस्तार होता जाता है वैसे-वैसे उसकी … Read more
भूमिका : कहते हैं समय अमूल्य धन है। यह प्रत्येक मनुष्य को बिना धन दिए प्राप्त होता है, किन्तु किसी भी कीमत पर इसे लौटाया नहीं जा सकता एक बार जाकर यह फिर वापस नहीं आता। इसीलिए महात्मा कबीर ने कहा है- काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में प्रलय होगी … Read more
भूमिका : वृक्ष हमारे लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। वह हमेशा चौकन्ना रहकर हमारी रक्षा के लिए तत्पर रहता है। इसके महत्त्व का बखान शब्दों में नहीं किया जा सकता है। वृक्ष जन्म लेने से लेकर मृत्योपरांत हमारे उपयोग में आता है लेकिन हमलोगों को भी उसकी महत्ता समझनी चाहिए। भोजन के लिए फल, जलावन की … Read more
“मन्द-मन्द हवा चली, विहुँस उठी कली-कली भौरे बोराए, ऋतुराज आए।” विषय-प्रवेश : ऋतुएँ तो अनेक हैं लेकिन वसंत की सज-धज निराली है। इसीलिए वह ऋतुओं का राजा, शायरों-कवियों का … Read more
भूमिका: वर्षा ऋतु ही धरती का धन धन और प्राणियों का जीवन है, यही कारण है कि लोगों ने यदि वसन्त को ऋतुओं को राजा कहा है, तो वर्षा ऋतुओं की रानी कहलाती है। दिनकर के शब्दों में-राजा बसन्त, वर्षा ऋतुओं की रानी। ऋतुओं की रानी : जेठ के उत्ताप से धरती झुलसने लगती है, … Read more
भूमिका : किसी भी राष्ट्र की उन्नति का एक मूल मंत्र है-राष्ट्रीय एकता। जिस राष्ट्र में एकता है वहाँ समृद्धि है, शांति है। जहाँ एकता नहीं है वहाँ गरीबी है, गुलामी है। राष्ट्रीय एकता का महत्त्व : अपना देश भारत एक विशाल देश है। यहाँ हिन्दू हैं, मुसलमान हैं, सिक्ख हैं, ईसाई हैं। अनेक धर्म … Read more
भूमिका : अनादि काल से नशीले पदाथों का सेवन किया जाता रहा है। कहते हैं कि देवता भी सोमरस पिया करते थे। लेकिन आज की युवा पीढ़ी यह समझने के लिए तैयार नहीं है कि तब वह शक्तिवर्धक के रूप में ग्रहण किया जाता था। अनेक प्रकार की प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ भी है जो नशा प्रदान … Read more
प्रस्तावना: सत्य एवं अहिंसा के पुजारी, त्याग एवं सहनशीलता की मूर्ति महात्मा गाँधी विश्व की महान् विभूति थे, जिन्हें संसार कभी भी भूल नहीं सकता। पीड़ितों एवं दलितों के उद्धारक महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात प्रांत के काठियावाड़ के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी … Read more
भूमिका: भारत में नारी को देवी के रूप में देखा जाता है। नारी का हृदय धरा समान होता है। अनेक कष्ट सहकर भी वह पुरुष को कष्ट नहीं होने देती है। प्राचीन काल में अनुसूया, लीलावती, मैत्रयी, अत्री, गार्गी आदि नारियों के अस्तित्व को देखते हुए कहा जा सकता है कि वेदिक युग में हमारे … Read more