हमारा देश भारत (Our Country India)

                                             “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी”

भूमिका : अर्थात् माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। माता हमें जन्म देती है। अनेक कष्टों को सहकर हमारा लालन-पालन करती है। ठीक हमारा देश और इसकी मिट्टी भी हमारे लिए वैसा ही है। इस संसार में जितना भी देश है, सब अपने देश को अच्छा मानते हैं।

जगतगुरु के रूप में: विश्व में सभ्यता का विकास ठीक से हुआ भी नहीं था, तब हमारे देश में वेदों की रचनाएँ हो रही थी। उपनिषदों की रचना हुई थी। जिससे मानव समाज को नया दर्शन मिला था। तभी तो कहा गया

                                           है क्या कोई देश यहाँ से जो न जिया है?

                                          सदुपदेश-पीयूष सभी ने यहाँ पिया है।

सियाराम शरण गुप्त की यह पंक्तियाँ गुरु के रूप में ज्ञान का अमृत पिलानेवाला यह देश विश्व को गणित, विज्ञान, अध्यात्म, चिकित्सा, अर्थशास्त्र आदि की शिक्षा दिया। चाहे वह देश पश्चिम का हो चाहे अरब, यूनान, रोम चीन।

विश्व मानचित्र पर: यह वह देश है जहाँ देवता भी बार-बार जन्म लेकर धन्य हुए। यह वह पवित्र भूमि है जहाँ विश्व भर से यथा-मेगास्थनीज, ह्वेनसांग, फाह्यान आदि यात्री कष्टकर यात्राएँ करके पधारे। अनेक देश हमारे देश का ऋणी हैं। उत्तर में सर्वोच्च हिमालय इस देश की शोभा बढ़ा रहा है। दक्षिण में समुद्र इसका पैर पखारता है। हृदय-स्थली हरी-भरी धरती और मोतियों की माला की तरह मीठे पानी से भरी नदियाँ और अनेक तीर्थस्थल आदि से ही हमारा भारत महान है।

भारत भ्रमण विश्व भ्रमण के समान: प्रकृति का सारा सौंदर्य इस देश की सम्पत्ति है। केसर की क्यारियाँ भरा स्वर्ग-सा कश्मीर, ताजमहल आठवें आश्चर्य के रूप में। अजन्ता, एलोरा-गुफाएँ, कुरुक्षेत्र, अयोध्या, ब्रज, नालंदा, मथुरा, लखनऊ, दिल्ली आदि विविध स्मृतियाँ संजोए है। जिसे दर्शनार्थ दुनियाँ के कोने-कोने से शैलानी आ-आकर इस बात का साक्षी बनते हैं कि भारत भ्रमण विश्व भ्रमण के समान है।

                                  भारत नहीं स्थान का वाचक, गुण-विशेष नर का है।

                                      एक देश का नहीं, शील यह भूमंडल का है।

उपसंहार : गुलामी समाप्त होने के बाद हमारा भारत संसार का सबसे मजबूत लोकतंत्र बनकर उभरा, जिसकी आज सब देश प्रशंसा करते हैं। मंद गति से ही सही लेकिन दृढ़ता से विकासोन्मुख है। बाधाएँ आना प्रकृतिस्थ है। आतंकवादी घटनाएँ मानवता को शर्मसार कर जाती हैं। परन्तु विश्वास है कि मेरे इस महान देश की आजादी को कोई भी देश झपट नहीं सकता है।

 

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