राष्ट्रीय एकता अथवा, भारतीय एकता (National Unity or Indian Unity)

भूमिका : किसी भी राष्ट्र की उन्नति का एक मूल मंत्र है-राष्ट्रीय एकता। जिस राष्ट्र में एकता है वहाँ समृद्धि है, शांति है। जहाँ एकता नहीं है वहाँ गरीबी है, गुलामी है।

 राष्ट्रीय एकता का महत्त्व : अपना देश भारत एक विशाल देश है। यहाँ हिन्दू हैं, मुसलमान हैं, सिक्ख हैं, ईसाई हैं। अनेक धर्म हैं, अनेक उपधर्म हैं। विविध भाषाएँ हैं। विभिन्न बोलियों है। साथ ही विभिन्न भागों में रहने वाले लोगों की जीवन-पद्धति भी भिन्न-भिन्न है, सबके खाने और पहनने का अपना- अपना ढंग है। इसलिए देश में राष्ट्रीय एकता की अत्यन्त आवश्यकता है।

बाधाएँ और दूर करने के उपाय : वस्तुतः आज हमारी राष्ट्रीय एकता पर खतरा उपस्थित है। चारों ओर राष्ट्रीय एकता को तोड़ने वाली शक्तियाँ सिर उठा रहीं हैं। देसी-विदेशी की समस्या है, अगड़े-पिछड़े की तकरार है, दक्षिण में हिन्दी विरोधी आन्दोलन है तो कश्मीर-असम में अलगाववाद की आग फैली हुई है। हिन्दू और मुस्लिम का झगड़ा अलग मुँह बाए खड़ा है। वस्तुतः यह संक्रान्ति काल है और हमें अपनी स्वतन्त्रता को बचाए रखने के लिए राष्ट्रीय एकता कायम करनी होगी। इसके बिना हमारी कोई गति नहीं है।

                                                                                   आज लोगों को बताने की जरूरत है कि राष्ट्र सर्वोपरि है। इसमें न कोई छोटा है और न बड़ा। सबकी अपनी-अपनी भूमिका है। जैसे पाँचों अंगुलियाँ छोटी-बड़ी और अलग-अलग हैं किन्तु सब मिल जाती हैं तो बड़े-से-बड़े कार्य को सहज सम्पन्न कर डालती हैं। वैसे ही हम सब मिलकर बड़ा-से-बड़ा काम आसानी से कर सकते हैं।         

उपसंहार : राष्ट्रीय एकता आज समय की आवश्यकता है। एकता से बढ़कर कोई वस्तु नहीं है। शेख सादी ने कहा भी है- ‘यदि चिड़ियाँ एकता कर लें तो शेर की खाल खींच सकती हैं।’ फिर हम तो आदमी हैं। आइए, राष्ट्रीय एकता कायम करने का संकल्प लेकर जुट जाएँ। कौन है जो आगे टिकेगा?

 

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