व्यायाम(Exercise)

भूमिका : हमने बहुत बार सुना है कि पहला सुख है निरोग शरीर। इसी की वजह से हम अन्य सभी सुखों का आनंद उठा सकते हैं। अपनी पढ़ाई पर ध्यान भी हम तभी कर सकते हैं जब हमारा शरीर स्वस्थ हो। व्यायाम शरीर को चुस्त और फुर्तीला का उत्तम मार्ग है।

लाभ : व्यायाम से शारीरिक शक्ति बढ़ती है, शरीर में रक्त का संचार होता है। शरीर फुर्तीला और चुस्त रहता है। मांसपेशियाँ सुदृढ़ रहती हैं। पाचन शक्ति ठीक रहती है। आलस्य दूर भागता है। शरीर में अनावश्यक चर्बी नहीं बढ़ती और शरीर गतिशील बना रहता है। व्यायाम करने वाले युवकों पर बुढ़ापा आक्रमण नहीं करता है। व्यायाम करने से पसीना आता है तथा विभिन्न प्रकार के अनावश्यक पदार्थ जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकते हैं- पसीने के साथ बाहर निकल आते हैं। इस प्रकार शरीर स्वस्थ रहता है।

हानि : प्रातःकाल की सैर, तैराकी, योगाभ्यास, खेल जैसे-क्रिकेट, बेडमिंटन, कबड्‌डी इत्यादि यह सभी व्यायाम के साधन हैं। अपनी रुचि और इच्छा के अनुसार हम किसी भी व्यायाम का चयन कर सकते हैं। आवश्यक यह है कि व्यायाम नियमित रूप से किया जाय। जोश में एक दिन क्षमता से अधिक व्यायाम कर लेने से हम थक जाएँगे। इसलिए चार दिन तक शरीर हिला न पाएँ, ऐसा नहीं होना चाहिए। तुरन्त किसी चिकित्सक को दिखाना चाहिए। किसी कुशल व्यक्ति के निर्देशन में ही व्यायाम करना चाहिए।

 निष्कर्ष : व्यायाम की आदत बचपन से ही डालनी चाहिए। स्वस्थ जीवना ही आनंद का स्रोत है। स्वस्थ व्यक्ति ही धनोपार्जन कर सकता है तथा सभी प्रकार के सुखों का भोग भी कर सकता है।

 

Leave a Comment