भूमिका : अनुशासन का अर्थ है- व्यवस्था, क्रम और आत्म-नियंत्रण। यह एक ऐसा गुण है जो समय की बचत करता है, धन और शक्ति का अपव्यय रोकता है तथा अतिरिक्त बल पैदा करता है। अनुशासन का मानव-जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है।
अनुशासन का महत्व : सिनेमा की टिकट खिड़की या बस पर चढ़ने वाले यात्रियों को लें। अधिकांशतः बस पर चढ़ने वाले यात्रियों में धक्का-मुक्की होती है। कभी-कभी एकाध खरोंच भी आ जाती है। यदि बस पर चढ़ने का कार्य अनुशासन से हो जाए तो सभी बस में बैठ जाएँगे और धक्का-मुक्की से उत्पन्न समस्याएँ भी नहीं पैदा होंगी।
अनुशासनहीनता के दुष्प्रभाव : अनुशासनहीनता के दुष्प्रभाव अनादि काल से ही देखने को मिलता है। महाभारत का युद्ध, राम-रावण युद्ध, जापान पर अणुबम का प्रयोग सब अनुशासन की मर्यादा भूलने के परिणाम हैं। दैनिक जीवन में यदि हम अनुशासित नहीं रहेंगें तो हमें असफलता का सामना करना पड़ेगा। यदि अनुशासन न पालन किया जाए तो सामाजिक ताना-बाना गड़बड़ हो जाएगा। पारिवारिक माहौल बिगड़ जाएगा। ग्रह एवं तारे भी अनुशासन नियम का पालन कर दिन-रात में परिवर्तित होता है।
अनुशासन से संयम आता है तथा सभ्यता का प्रारंभ होता है। आज की नवीन सभ्यता अनुशासन का ही देन है। ग्रामीण सभ्यता में कोई रहन-सहन का व्यवस्थित तरीका नहीं, बोल-चाल में अनुशासन नहीं, इसलिए वे पिछड़ जाते हैं। दूसरी ओर शहरी सभ्यता में हर चीज की एक व्यवस्था है, बोलने का, कार्य करने में एक नियमित क्रम है, इसलिए आज उसका आकर्षण है।
निष्कर्ष : मुट्ठी भर अंग्रेजों ने विशाल भारत को किस प्रकार गुलाम बनाया? निश्चय ही अनुशासन के बल पर। अनुशासन से शक्तियों का केंद्रीकरण होता है, गतिशील ऊर्जा का जन्म होता है तथा जीवन सहज, सरल और सुंदर बन जाता है।