गरीबी(Poverty)

भूमिका: भोजन, वस्त्र और आवास की समस्या से जूझना ही गरीबी है। दो जून की रोटी की जुगाड़ ही गरीबी है। अधूरे सपने लेकर जीवन-पर्यन्त गरीबी से लड़ते हुए मौत के मुँह में समा जाना गरीबी है।

गरीबी के कारण : हमारे देश में जन-जाति, दलित और खेतिहर मजदूर गरीबी की श्रेणी में आते हैं। बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में देश के लगभग 60 प्रतिशत लोग गरीबी की मार झेलने को मजबूर हैं। इसका मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या दर, निरक्षरता, खराब स्वास्थ्य और वित्तीय संसाधनों की कमी तथा अशिक्षा। गरीबी के कारण ही प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय में कमी आई है।

 पूरे दिन मेहनत करने वाले कारीगरों की दैनिक मजदूरी बहुत कम हो उसपर दलालों की गिद्ध-दृष्टि उनके मुँह का निवाला भी छिनने में नहीं शर्माती ।

 गरीबी उन्मूलन के उपाय : गरीबी को मिटाने के लिए सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार निःशुल्क शिक्षा, कौशल विकास केन्द्र खोलकर तकनीकी शिक्षा की रोजगारपरक व्यवस्था की है। मनरेगा द्वारा लोगों का आय बढ़ाई जा रही है। शौचालयों एवं बिजली-पानी निःशुल्क मुहैया कराई जा रही है। गाँव-शहर की दूरी सड़कों द्वारा आसान हो गई है। ‘आशा’ कार्यकर्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता, गैर सरकारी संस्थाएँ भी सहयोग कर रही हैं।

निष्कर्ष : मानव जीवन को सम्मान से जीने के लिए रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य एवं शिक्षा-मूलभूत आवश्यकताएँ बन गयी हैं। धीरे-धीरे गरीबों का जीवन-स्तर सुधर रहा है। हमारी सरकार की पूरी कोशिश है जनता को गरीबी जैसे अभिशाप से मुक्ति मिले।.

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