देशसेवा वेशभक्ति वेशप्रेम: समाज-सेवा (Service to the Nation and Patriotism: Social Service)
एक कवि ने कहा है- “जो भरा नहीं भावों से, जिसमें बहती रसधार नहीं, हृदय नहीं वह पत्थर है. जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।” भूमिका: समाजसेवा, देशसेवा, देशभक्ति, देशप्रेम मनुष्य की नैसर्गिक प्रवृत्ति है। पक्षियों को अपने घोंसले से प्यार होता है. पानी के बिना मछली तो मनुष्य हैं। जिस धरती पर सरक-सरक कर हम … Read more