अथवा, राष्ट्रीय पर्व (स्वतंत्रता दिवस या भारतीय पर्व)
स्वतंत्रता राष्ट्रों का शाश्वत यौवन है।
विषय-प्रवेश : स्वतंत्रता सबसे बड़ा वरदान है। जब कोई राष्ट्र, दुर्भाग्य से परतंत्र हो जाता है तो दुर्गति हो जाती है। आपसी फूट और वैमनष्य से भारत को भी यह अभिशाप सदियों सहना पड़ा है।
स्वतंत्रता संघर्ष : अंग्रेजों की गुलामी जब असह्य हो उठी, तो देश जागा और आजादी की जंग छिड़ी। दमन का चक्र चला लेकिन आखिर शहीदों का खून रंग लाया और गाँधीजी की युक्ति काम आई। जिस सरकार के राज्य में सूरज कभी नहीं डूबता था, ऐसी शक्तिशाली साम्राज्यवादी सरकार भी, आखिर निहत्थे भारतवासियों के सामने झुक गई। अंग्रेजों को भारत की स्वतंत्रता की घोषणा करनी पड़ी। 15 अगस्त, 1947 का पावन दिन आया। स्वतंत्रता का नवप्रभात निकला। भारत के राजनीतिक इतिहास का यह स्वर्णिम दिन है।
स्वतंत्रता तो आई लेकिन देश के दो टुकड़े हो गए। भीषण रक्तपात हुआ। साम्प्रदायिकता की दीवार खड़ी हो गई।
स्वतंत्रता दिवस पर हर्ष और उल्लास : लेकिन स्वतंत्रता तो स्वतंत्रता ही होती है। स्वतंत्रता का समाचार सुनकर भारतवासी प्रसन्नता से झूम उठे। भारत के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक हर्ष की लहर दौड़ गई। सभी बेसब्री से आजाद भारत की रूपरेखा लिए इस दिन का इन्तजार करने लगे। 15 अगस्त की भोर भी क्या मनोरम भोर थी! प्रत्येक गली संगीत से गूंज उठी। यह संगीत हृदय का संगीत था। इससे कोई भी अछूता नहीं रहा-
उठो सोने वाले, सवेरा हुआ है।
वतन के शहीदों का फेरा हुआ है।
दिल्ली तो उस दिन नई नवेली दुल्हन बनी थी। इस दिन स्वतंत्रता संघर्ष के महान् सेनानी और प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लाल किले पर राष्ट्रीय झण्डा फहराया। उस दिन प्रत्येक क्षण ने एक उत्सव का रूप धारण कर लिया था। अनेक कार्यक्रम रखे गए। शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलियाँ अर्पित की गईं। भारत के स्वर्णिम भविष्य के लिए अनेक योजनाओं की घोषणा हुई। 15 अगस्त की रात्रि को ऐसी दीप-मालिका की गई कि आकाश में चमकने वाले असंख्य तारों ने भी अपना मुँह छिपा लिया।
हमारा कर्त्तव्य : इसी दिन की याद में प्रत्येक वर्ष स्वाधीनता दिवस मनाया जाता है। दिल्ली में प्रधानमंत्री लाल किला पर झंडा फहराते और राष्ट्र को संबोधित करते हैं। राज्यों की राजधानियों में मुख्यमंत्री यह कार्य करते हैं। अनेक कार्यक्रम होते हैं, सेना की टुकड़ियों की परेड होती है। झाँकियाँ निकलती हैं। स्वतंत्रता बनाए रखने की प्रतिज्ञा होती है। यही हमारा कर्त्तव्य होना चाहिए।
उपसंहार : स्वतंत्रता दिवस ऐतिहासिक दिन हैं और स्वतंत्रता एक अमूल्य वस्तु। इसके लिए हमने महान् त्याग किया है। अनेक देशभक्तों ने भारत माता के सिर पर ताज रखने के लिए अपना जीवन उत्सर्ग कर दिया है। इस दिन हमें एकजुट होकर राष्ट्र की एकता और अखण्डता को अक्षुण रखने की प्रतिज्ञा करनी चाहिए।
हर पन्द्रह अगस्त पर साथी, हम सब व्रत धारें।
जननी जन्मभूमि की खातिर, अपना सब कुछ वारें ।।