मित्रता(Friendship)

                                                 मित्रता बड़ा अनमोल रतन, कब इसे तौल सकता है धन?                     

भूमिका सच है, मित्रता अनमोल धन है. अतुलनीय है। जिसे सच्चा मित्र  मिल जाता है, उसका हर दुख आधा हो जाता है।

मित्र चयन में सतर्कता: मनुष्य जब संसार-सागर में उतरता है तो उसे किसी की बातें और किसी की दरियादिली। युवा मन इन्हीं में से किसी पर बहुत लोग मिलते हैं। किसी की अदा निराली होती है. किसी का रंग-रूप, फिदा हो जाता है और उसे मित्र बना लेता है। ऐसे लोग शायद ही मित्रता निभाते हैं। अधिकतर मतलबी होते हैं. कुछ दिन मौज-मस्ती की और खिसके।

 सच्चे मित्र से ला वस्तुतः सच्ची मित्रता वहीं होती है. जहाँ विचारों की एकता होती है। इसमें समृद्धि, निर्धनता जाति-पाति आडे नहीं आती।कृष्ण राजा थे, सुदामा निर्धन फिर भी दोनों में गाढी मित्रता थी। इसी प्रकार, राम और सुग्रीव गाढे मित्र थे। कहते हैं महाकवि तुलसी और कविवर रहीम भी मित्र थे।

 

बुरे से हानि : कभी विपरीत विचारों वालों में भी मित्रता हो जाती है क्योंकि हम चाहते हैं कि जो गुण हममें नहीं है, उस गुणवाला कोई मिल जाए। राम शान्त स्वभाव के थे किन्तु भावावेश में आने वाले लक्ष्मण को वे बहुत चाहते थे। चिन्तन प्रिय व्यक्ति प्रफुल्ल चित्त वाले को, निर्बल बलवान को और वीर उत्साही को खोजता है।

                                                                                                             वस्तुतः सच्चे मित्र में उत्तम वैद्य की सी निपुणता और परख होती है। जैसे वैद्य अपनी औषधि से शरीर के विकार को निकाल देता है, वैसे ही सच्चा मित्र अपनी सलाह से अपने मित्र को दुगुर्गों से बचाता, संकट में उसकी रक्षा करता और दुर्दिन में उसकी सहायता करता है। रामचन्द्र शुक्ल की दृष्टि में सच्चे मित्र में माता-सा धैर्य और कोमलता होती है। सच्चा मित्र आनन्द को दुगुना और दुख को आधा कर देता है।

उपसंहार : इसलिए किसी से मित्रता बहुत सोच-विचार कर, जाँच-परख कर करनी चाहिए। मुँह के सामने प्रशंसा और पीठ पीछे बुराई करनेवालों से सदा सचेत रहना चाहिए। सुविधा से अपना काम निकाल कर खिसक जानेवाले लोग बहुत मिलते हैं, वे मित्र नहीं होते, मतलबी होते हैं। कहा है-

 मतलबी यार किसके ? काम निकला और खिसके।

                     सच्ची बात तो यह है कि मित्रता दैवी देन है और मनुष्य के लिए वरदान। यही कारण है कि सच्चे मित्र बहुत नहीं होते।

सच्चा मित्र जीवन में एक वरदान है। वह भूले-भटके को राह दिखाता और मित्र की सोई किस्मत को जगाता है

 

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