दुर्गा पूजा (Durga Puja)

या देवी सर्वभूतेषु मातुरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः

या देवी सर्वभूतेषु शांतिरूपेण संस्थिता नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

भूमिका :यह कर्णप्रिय मंत्रोच्चार जब शुरू होता है तो पता चल जाता है कि आश्विन माह का शुक्ल प्रतिपदा है और कलशस्थापन हो गया है। माँ दुर्गा शक्तिदायिनी शक्तिरूपिणी है। दुर्गतिनाशिनी है।

धार्मिक कथा: वैसे तो, अनेक धार्मिक कथाएँ विभिन्न तरह से बताई जाती हैं, जो वेद, पुराण, देवी भागवत, उपनिषद आदि में वर्णित हैं। लेकिन हमारे यहाँ जो कथा प्रचलित है उसमें कहा जाता है कि लंकापति रावण दंभी-अभिमानी, पापी आत्ताई; लेकिन शिवाशीष से अपराजेय था। अतः भगवान राम ने माँ दुर्गा से आशीर्वाद लेकर उसका संहार किया। चूँकि उसका दस आनन (सिर) था इसलिए दशहरा और दशमी तिथि को रावण पर विजयी प्राप्त की, इसलिए विजयादशमी के नाम से भी इस पर्व को मनाते हैं।

लाभ : कोई भी त्योहर सामाजिक सौहार्द, मैत्रीभाव, बन्धुत्व को बढ़ाता है। लेकिन सबसे बड़ी सोच यह है कि राष्ट्र की सबलता जिन बातों पर निर्भर करता है, वह है, संपत्ति, विद्या, ज्ञान, शारीरिक आदि; बलों के समुचित रूप में विद्यमान होना। यहाँ दुर्गा के साथ सरस्वती विद्याबल, लक्ष्मी-संपत्तिबल, गणेश-ज्ञानबल, कार्तिकेय पशुधनबल के साथ-ही-साथ लोगों की एकजुटता शारीरिक बल का होना राष्ट्रबल का प्रतीक बन जाता है।

हानि: इस त्योहर की कुछ हानियाँ भी हैं; जैसे-मूर्ति के लिए मिट्टी कटने से मृदा प्रदूषण, उच्च ध्वनि तरंगों में ध्वनिविस्तारक यंत्रों का बजाना ध्वनि प्रदूषण, हवन से निकलने वाले धुएँ से वायु प्रदूषण, समाप्ति के उपरान्त जलसमाधि से जल प्रदूषण मुख्य हानियाँ तो है ही चंदा उगाही को लेकर कुछ दबंग लोगों द्वारा बल का प्रयोग सामाजिक वैमनस्य पैदा करता है। इसके अलावे मेला में भीड़ जुटने से कई प्रकार का आपराधिक व साम्प्रदायिक दुर्घटना भी दुर्योगवश हो जाया करती है।

उपसंहार : इस प्रकार, हम निष्कर्ष पर पहुँचते हैं तो पाते हैं कि यह त्योहार असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय की आसुरीबल पर दैवीबल की जीत है। जहाँ महिषासुर और माँ दुर्गा प्रतीक रूप में है।:

 

Leave a Comment