भूमिका : प्रगति के पथ पर मानव बहुत दूर चला आया है। आज संसार मानव की मुट्ठी में समाया है। जीवन के क्षेत्रों में सबसे अधिक क्रांतिकारी कदम ‘संचार’ के क्षेत्रों में उठाए गए हैं।
संचार क्रांति का स्वरूप: संचार साधनों में सबसे अहम् भूमिका ‘इन्टरनेट’ की है। इसकी शुरूआत 1969 में एडवान रिचर्स प्रोजेन्टस एजेंसिज द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के चार विश्वविद्यालयों के कम्प्यूटरों की नेटवर्किंग कर की गई।
संचार क्रांति से लाभ: 1971 तक इस कम्पनी ने लगभग दो दर्जन कम्प्यूटरों को इस नेट से जोड़ दिया। 1972 में ई-मेल की शुरूआत हुई जिसने ‘संचार जगत’ में क्रांति ला दी। इसका उपयोग तेजी से हमलोग फेस बुक, व्हाट्सएप, इन्स्टाग्राम, वीडियो कॉलिंग, चेटिंग कर सकते हैं।
संचार क्रांति से हानि: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ‘गूगल’ सर्च के द्वारा जीवनोपयोगी कोई भी सवाल का उत्तर जान सकते हैं। धीरे-धीरे इन्टरनेट के क्षेत्र में भूचाल आ गया। 1994 में नेट स्कैप कम्यूनिकेशन और 1995 में ‘माइक्रोसॉफ्ट’ के ब्राउजर बाजार में उपलब्ध हो गए। लगभग 05 करोड़ लोगों ने इन्टरनेट का प्रयोग शुरू कर दिया है। दिन-प्रतिदिन संचार माध्यम के नए-नए रास्ते खुलते गए। नई-नई शब्दावलियाँ जैसे ई-मेल, वेबसाइट, वायरस, लवबग आदि इससे जुड़ते गए। अब तो लोग मोबाइल में ही लगे रहते हैं पढ़ाई न कर पाते। बड़ी दुर्घटना मोबाइल पर वयस्त रहने के कारण बढ़ गई है। बच्चे मोवाइल के चक्कर में पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कुछ जाहिल लोग मोबाइल पर धमकी भी देने लगे हैं।
निष्कर्ष : अब तो ऐसा लगता है कि रोटी, कपड़ा, मकान की तरह इन्टरनेट भी जीवन के लिए उपयोगी हो गया। इसके अभाव में हम अपने आप को अपाहिज, समझने लगते हैं।