हमारा देश भारत (Our Country India)
“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” भूमिका : अर्थात् माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। माता हमें जन्म देती है। अनेक कष्टों को सहकर हमारा लालन-पालन करती है। ठीक हमारा देश और इसकी … Read more
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“जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” भूमिका : अर्थात् माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है। माता हमें जन्म देती है। अनेक कष्टों को सहकर हमारा लालन-पालन करती है। ठीक हमारा देश और इसकी … Read more
‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ आत्मा निवास करती है – सुक्ति भूमिका : स्वच्छता से तात्पर्य साफ सफाई से है। सफाई हम अपने शरीर की करें। अपने परिवेश की करें। अपने मन एवं आत्मा की … Read more
बिहार बोर्ड हर साल परीक्षा के तुरंत बाद आधिकारिक तौर पर वस्तुनिष्ठ (Objective) प्रश्नों के लिए उत्तर कुंजी जारी करता है। चूँकि बिहार बोर्ड के परीक्षा पैटर्न में 50% प्रश्न बहुविकल्पीय (MCQs) होते हैं, इसलिए यह उत्तर कुंजी छात्रों के कुल अंकों को निर्धारित करने में बड़ी भूमिका निभाती है। विवरण जानकारी बोर्ड का नाम … Read more
भारत सरकार द्वारा संचालित National Scholarship Portal (NSP) देश के लाखों छात्रों के लिए शिक्षा का एक मजबूत आधार स्तंभ बन चुका है। NSP Scholarship 2026 उन मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं लेकिन वित्तीय बाधाओं के कारण पीछे रह जाते … Read more
“देव-पद के अभिलाषी सरस्वती का आवाहन करते हैं।” – ऋग्वेद विषय-प्रवेश : ज्ञान और संगीत मानव विकास के मूल हैं। अपने देश में अनादि काल से ज्ञान और संगीत की देवी के रूप में … Read more
समाचार पत्र संसार के दर्पण हैं। भुमिका : मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जैसे-जैसे उसकी सामाजिकता में विस्तार होता जाता है वैसे-वैसे उसकी … Read more
भूमिका : कहते हैं समय अमूल्य धन है। यह प्रत्येक मनुष्य को बिना धन दिए प्राप्त होता है, किन्तु किसी भी कीमत पर इसे लौटाया नहीं जा सकता एक बार जाकर यह फिर वापस नहीं आता। इसीलिए महात्मा कबीर ने कहा है- काल करे सो आज कर, आज करे सो अब। पल में प्रलय होगी … Read more
भूमिका : वृक्ष हमारे लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। वह हमेशा चौकन्ना रहकर हमारी रक्षा के लिए तत्पर रहता है। इसके महत्त्व का बखान शब्दों में नहीं किया जा सकता है। वृक्ष जन्म लेने से लेकर मृत्योपरांत हमारे उपयोग में आता है लेकिन हमलोगों को भी उसकी महत्ता समझनी चाहिए। भोजन के लिए फल, जलावन की … Read more
“मन्द-मन्द हवा चली, विहुँस उठी कली-कली भौरे बोराए, ऋतुराज आए।” विषय-प्रवेश : ऋतुएँ तो अनेक हैं लेकिन वसंत की सज-धज निराली है। इसीलिए वह ऋतुओं का राजा, शायरों-कवियों का … Read more
भूमिका: वर्षा ऋतु ही धरती का धन धन और प्राणियों का जीवन है, यही कारण है कि लोगों ने यदि वसन्त को ऋतुओं को राजा कहा है, तो वर्षा ऋतुओं की रानी कहलाती है। दिनकर के शब्दों में-राजा बसन्त, वर्षा ऋतुओं की रानी। ऋतुओं की रानी : जेठ के उत्ताप से धरती झुलसने लगती है, … Read more