इस्लाम धर्म

खुदा के प्रति पूर्ण समर्पण ही इस्लाम है“। इस्लाम का उदय मक्का में हुआ। इसके संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब (कुरैश) थे। उनका जन्म 570 ई. में मक्का में कुरैश कबीले में हुआ। उनके पिता अब्दुल्ला थे, जिनकी मृत्यु उनके जन्म से पहले हो गई। उनकी माता अमीना थीं, जिनका देहान्त मुहम्मद साहब की 6 वर्ष की अवस्था में हो गया। उनका पालन-पोषण उनके चाचा अबू तालिब ने किया, जो कबीले के स्वामी थे।

हजरत मुहम्मद ने 25 वर्ष की अवस्था में एक 40 वर्षीय धनी विधवा महिला खदीजा से विवाह किया। इनकी पुत्री का नाम फातिमा तथा दामाद का नाम अली था।

इस्लाम का आधार एकेश्वरवाद है, अर्थात् अल्लाह की सीधे आराधना करनी चाहिए (मूर्तिपूजा का विरोध किया गया)।

622 ई. में हजरत मुहम्मद मक्का से मदीना चले गए (24 सितंबर, 622 ई.)।

इस्लाम जगत में मक्का त्यागकर मदीना जाने की यात्रा को ‘हिजरत‘ कहा गया है और इसी दिन से हिजरी संवत् (मुस्लिम संवत्) आरम्भ हुआ।

मदीना में पवित्र कुरान की रचना हुई, जो अरबी भाषा में संप्रेषित की गई। इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रंथ ‘कुरान‘ है।

जिब्राइल ने आदेश दिया कि “अल्लाह एक है और मुहम्मद अल्लाह के पैगम्बर हैं।”

मुहम्मद पैगम्बर कहलाए और उन्होंने कुरान की शिक्षाओं का संदेश दिया।

मोहम्मद के अनुयायियों के पाँच कर्तव्य—

  1. कलमा

  2. प्रतिदिन पाँच बार नमाज पढ़ना

  3. रोजा (व्रत)

  4. हज (तीर्थयात्रा)

  5. जकात (धार्मिक कर)

मुहम्मद ने खुदा को केन्द्र मानकर मदीना (मुस्लिम राज्य) की स्थापना की तथा शासन का आधार कुरान था। कुरान के धार्मिक कानूनों को ‘जवाबित‘ कहा जाता है।

8 जून, 632 ई. को 63 वर्ष की अवस्था में हजरत मुहम्मद साहब की मृत्यु हो गई तथा उन्हें मदीना में दफनाया गया।

कुरान में ‘खलीफा‘ शब्द प्रतिनिधि के लिए प्रयुक्त हुआ है, लेकिन पैगम्बर के उत्तराधिकारियों को भी ‘खलीफा‘ कहा जाता है एवं उनके साम्राज्य को ‘खिलाफत‘ कहा जाता था।

हजरत मुहम्मद की मृत्यु के बाद इस्लाम धर्म सुन्नी तथा शिया नामक दो पंथों में विभक्त हो गया।

चार खलीफा थे—

  1. अबु बक्र (632–634 ई.) – सुन्नी

  2. उमर (634–644 ई.) – सुन्नी

  3. उस्मान (644–656 ई.) – सुन्नी

  4. अली (656–661 ई.) – शिया

सुन्नी उसे कहते हैं जो ‘सुन्ना‘ (पैगम्बर मुहम्मद साहब के कथनों तथा कार्यों का विवरण) में विश्वास रखते हैं।

शिया वे हैं जो अली की शिक्षाओं में विश्वास करते हैं तथा अली को मुहम्मद साहब का ‘न्यायसम्मत अधिकारी‘ मानते हैं।

सर्वप्रथम पैगम्बर साहब का जीवन-चरित्रइब्न ईशाक‘ ने लिखा।

1258 ई. में हालाकू (मंगोल नेता) ने अब्बासी खलीफा की हत्या कर दी थी। अब्बासी वंश को इस्लाम का स्वर्णकाल माना जाता है।

1924 ई. में “मुस्तफा कमाल पाशा” (तुर्की शासक) ने खलीफा पद को समाप्त कर दिया।

 

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