भारतीय किसान (The Indian Farmer)

विषय प्रवेश: देश की आजादी के बाद बहुत कुछ बदल गया है लेकिननहीं बदला है तो भारत का किसान। आज भी वह वैसा ही है-घुटनों तक धोती, पाँव नंगे, आधा पेट भोजन और वही टूटी मड़ैया तथा सिर पर कर्ज का बोझ । आशा थी कि आजादी आएगी तो देश के किसानों का भाग्योदय होगा। लेकिन नहीं, आज भी भारतीय किसान गरीबी की चक्की में उसी तरह पिस रहा है, बाढ़ और सूखे से जूझ रहा है।

 किसानों की स्थिति एवं बदहाली के कारण: कहते हैं, भारत के किसान ऋण में जन्म लेते, ऋण लेकर ही जीते और ऋणी बने ही मरते हैं। कइनकी गरीबी का कारण है जोत की कमी, पुराने औजार और कभी सिंचाई के साधनों का अभाव किसानों को विपन्न बना जाता है, तो कभी वर्षा की अधिकता उन्हें बेघर कर देती है।

‘दिनकर’ ने लिखा है-

                              “मुख में जीभ, शक्ति भुज में, जीवन में सुख का नाम नहीं है,

                               वसन कहाँ ? सूखी रोटी भी मिलती दोनों शाम नहीं है।”

उन्नति के उपाय : अतः देश को सुखी-संपन्न बनाने के लिए किसानों की हालत पर ध्यान देना होगा। किसानों की आर्थिक दशा सुधारने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि छोटी-छोटी जोतों को कम कर नहरों और नल-कूपों का जाल पूरे देश में बिछा दिया जाय। गाँवों में किसानों की सहयोग समितियाँ स्थापित की जाएँ जिनके माध्यम से अच्छे बीज, खाद और कम ही व्याज पर ऋण मिल सके। वैज्ञानिक ढंग से खेती करने की शिक्षा दी जाए और कुटीर उद्योगों का विकास किया जाय ताकि खेती पर बोझ कम पड़े। ऐसे अनाज-भंडार बनाए जाने चाहिए जहाँ किसान अपनी उपज सुरक्षित रख सकें और उपयुक्त मूल्य पर ही बेच सकें ताकि उनके परिश्रम का पूरा लाभ उन्हें मिले।

उपसंहार : सबसे महत्त्वपूर्ण है किसानों की शिक्षा। हमारे अधिकतर किसान अशिक्षित हैं। अतएव वे खेती की वैज्ञानिक प्रणाली नहीं अपनाते। फलतः अपेक्षित उत्पादन नहीं होता। वे यह भी नहीं जानते कि मिट्टी की जाँच उनके लिए फायदेमंद है या कौन-सी फसल से कम लागत में अधिक लाभउठाया जा सकता है। किसानों को उनके खाली समय में जीवनोपयोगी शिक्षा की अत्यन्त आवश्यकता है ताकि वे अंधकार से निकल सकें और चालबाजों से बच सकें। इसी में भारत के किसानों और देश का कल्याण है।

 

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