भागवत धर्म का उद्भव मौर्योत्तर काल में हुआ। इस धर्म के संबंध में प्रारम्भिक जानकारी उपनिषदों से प्राप्त होती है। वैष्णव धर्म के संस्थापक वासुदेव कृष्ण माने जाते हैं।
छान्दोग्य उपनिषद् में श्रीकृष्ण का प्रथम उल्लेख मिलता है। वहाँ उन्हें वृष्णि वंशीय यादव कुल का नेता, देवकी का पुत्र तथा अंगीरस का शिष्य बताया गया है।
ऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार कृष्ण ही नारायण हैं। आगे चलकर वासुदेव कृष्ण को वैदिक देवता विष्णु का अवतार माना गया और बाद में उनका समीकृत रूप नारायण से स्थापित हुआ। नारायण के अनुयायियों को पांचरात्रिक तथा उनके धर्म को पांचरात्र कहा गया।
अष्टाध्यायी के माध्यम से सर्वप्रथम वासुदेव के दैवीकरण का उल्लेख मिलता है। भागवत धर्म का संबंध संभवतः सूर्य-पूजा से भी माना जाता है।
श्रीमद्भगवद्गीता में भागवत धर्म के सिद्धांत निहित हैं।
विष्णु के अवतारों की अधिकतम संख्या 24 मानी गई है, किंतु मत्स्य पुराण में दस प्रमुख अवतारों का उल्लेख मिलता है— मत्स्य, कूर्म, वराह, नृसिंह, वामन, परशुराम, राम, बलराम, बुद्ध और कल्कि। कल्कि अवतार भविष्य में प्रकट होगा।
इन अवतारों में कृष्ण का नाम इसलिए नहीं है क्योंकि वे स्वयं भगवान के साक्षात् स्वरूप माने जाते हैं। विष्णु के अवतारों में वराह अवतार विशेष रूप से लोकप्रिय था। वराह का प्रथम उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।
अवतारवाद का सर्वप्रथम उल्लेख भगवद्गीता में प्राप्त होता है।
विष्णु की पूजा चतुर्व्यूह— साम्ब, अनिरुद्ध, प्रद्युम्न और संकर्षण— के साथ की जाती है। चतुर्व्यूह पूजा का प्रथम उल्लेख विष्णु संहिता में मिलता है।
वैष्णव धर्म में पांचरात्र का विशेष महत्व है—
- वासुदेव (कृष्ण)
- संकर्षण
- लक्ष्मी
- अनिरुद्ध
- प्रद्युम्न
विष्णु के सुदर्शन चक्र में छह तिल्लियाँ मानी जाती हैं।
दक्षिण भारत में भागवत धर्म के अनुयायी आलवार कहलाते हैं।
यूनानी लेखक मेगस्थनीज ने श्रीकृष्ण को “हेराक्लीज़” (Herakles) के रूप में उल्लेखित किया है।
वैष्णव धर्म के सिद्धान्त एवं शाखाएँ
| सम्प्रदाय | दार्शनिक मत (सिद्धान्त) | प्रवर्तक आचार्य | समय (शताब्दी) |
| वैष्णव सम्प्रदाय | विशिष्टाद्वैत | रामानुजाचार्य | 12वीं शताब्दी |
| ब्रह्म सम्प्रदाय | द्वैतवाद | माधवाचार्य (आनन्दतीर्थ) | 13वीं शताब्दी |
| रूद्र सम्प्रदाय | शुद्धाद्वैत | विष्णु स्वामी / वल्लभाचार्य | 13वीं शताब्दी |
| सनक सम्प्रदाय | द्वैताद्वैत | निम्बार्काचार्य | 13वीं शताब्दी |