ईसाई धर्म (Christianity) विश्व के सबसे बड़े धर्मों में से एक है। यह धर्म लगभग 2000 वर्ष पहले शुरू हुआ और इसके अनुयायी पूरी दुनिया में पाए जाते हैं।
🔹 संस्थापक
ईसाई धर्म की स्थापना Jesus Christ ने की। उन्हें ईश्वर का पुत्र और मानव जाति का उद्धारकर्ता माना जाता है।
🔹 पवित्र ग्रंथ
ईसाइयों का पवित्र ग्रंथ Bible है।
यह दो भागों में विभाजित है:
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पुराना नियम (Old Testament)
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नया नियम (New Testament)
🔹 मुख्य शिक्षाएँ
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एक ईश्वर में विश्वास
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प्रेम और क्षमा का संदेश
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सत्य और दया का पालन
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पाप से मुक्ति का मार्ग
🔹 उपासना स्थल
ईसाई लोग चर्च (Church) में प्रार्थना करते हैं।
🔹 प्रमुख त्योहार
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Christmas – ईसा मसीह के जन्म का उत्सव
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Easter – ईसा मसीह के पुनरुत्थान का उत्सव
🔹 प्रमुख केंद्र
Vatican City ईसाई धर्म (विशेषकर रोमन कैथोलिक) का प्रमुख धार्मिक केंद्र है।
ईसाई धर्म के संस्थापक “ईसा मसीह” थे (मूलतः एक यहूदी थे)। ईसा मसीह का जन्म फिलीस्तीन में येरूशलम (जेरूसलम) के निकट बैथलेहम नामक गाँव में हुआ। इनकी माता ‘मरियम‘ और पिता ‘जोसेफ‘ थे। ये दोनों ‘सुथार‘ का कार्य करते थे। ईसा शब्द का शाब्दिक अर्थ ‘मुक्तिदाता‘ होता है। इनका जन्म 25 दिसंबर 4 ई.पू. को एक घुड़साल में हुआ। इसी दिवस को ‘क्रिसमस डे‘ के रूप में मनाया जाता है।
ईसा मसीह ने सर्वप्रथम उपदेश गैलिली (प्रांत) में दिया। यह उपदेश पर्वतीय क्षेत्र में दिया गया था। ईसा मसीह के कुल 12 शिष्य थे, जिनमें प्रथम दो शिष्य एंड्स व पीटर थे।
ईसा मसीह को तत्कालीन रोमन गर्वनर पॉन्टियस पाइलेट ने 33 ईस्वी में शुक्रवार के दिन जेरूसलम नगर के बाहर गुलगोथा की पहाड़ी पर सूली पर चढ़ा दिया गया तथा उनकी मृत्यु हो जाती है।
जेरूसलम को ईसाई समाज की जननी और सबसे पवित्र तीर्थ स्थल कहा जाता है। ईसाई धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ बाइबिल है। 19वीं शताब्दी में बाइबिल का हिंदी अनुवाद ‘कैरे‘ ने किया, जिसे ‘धर्मशास्त्र‘ के नाम से जाना जाता है।
ईसाई धर्म का सबसे पवित्र चिन्ह ‘क्रॉस‘ है। ईसाई ‘त्रित्व‘ में विश्वास रखते हैं— ईश्वर-पिता, ईश्वर-पुत्र, और ईश्वर-पवित्र आत्मा।