इस्लाम का उदय तथा अरब आक्रमण

इस्लाम का उदय 7वीं सदी में अरब में हुआ। इसके प्रवर्तक Muhammad (570–632 ई.) थे। कुरान के धार्मिक कानून को ‘जवाबित’ कहा गया है।

मदीना के कुरैश तथा मुस्लिमों के बीच तीन युद्ध हुए—
जंगे बंदर मार्च–अप्रैल, 624 ई.
जंगे उहद मार्च, 625 ई.
जंगे खंदक मार्च–अप्रैल, 627 ई.

इस्लामी कानून बादशाह को राजनैतिक संस्था स्वीकार नहीं करता, इसीलिए उत्तराधिकार के नियम को भी नहीं मानता।

मोहम्मद बिन कासिम से पहले अरबों के दो असफल आक्रमण भारत पर हुए—
पहला – 711 ई. में उबैदुल्लाह के नेतृत्व में।
दूसरा – 711 ई. में बुदैल के नेतृत्व में।

Muhammad ibn Qasim ने 712 ई. में मकरान के रास्ते स्थल मार्ग से भारत पर हमला किया था। कासिम ने जिन स्थानों पर आक्रमण किया—
देवल, नेऊन, सेहवान, सीसम, रावर, ब्राह्मणाबाद, आलोर, मुल्तान।

राजा दाहिर की मृत्यु रावर की लड़ाई में हुई थी। कासिम ने दाहिर की पुत्रियों (सूर्यदेवी तथा परिमल देवी) को ब्राह्मणाबाद से पकड़ा था।

बजहरा सीसम के जाटों का सेनापति था। वह कासिम के सीसम पर आक्रमण के समय मारा गया था।

मोहम्मद बिन कासिम तथा खलीफा वलीद की मृत्यु 714 ई. में हुई। वलीद के बाद सुलेमान खलीफा बना। चालुक्य शासक पुलिकेशिराज अवनिजनाश्रय को अरबों को पराजित करने के कारण नौसारी अभिलेख में ‘दक्षिणपथ के ठोस स्तम्भ’ की उपाधि दी गई है।

जजिया कर लगाने वाला पहला शासक मोहम्मद बिन कासिम था।

भारत पर अरबों का प्रथम आक्रमण 636 ई. में खलीफा उमर के समय थाणे पर हुआ था। पश्चिम से भारत में प्रवेश करने के चार स्थल मार्ग थे—

  1. हैबर की घाटी से
  2. बोलन की घाटी से
  3. मकरान तट से
  4. जलमार्ग से

सर विलियम म्योर के अनुसार, “सिंध विजय ने इस्लामी नीतियों में एक नये युग का प्रारंभ किया।”

गिबन के अनुसार, “हजरत मुहम्मद स.अ. ने एक हाथ में तलवार तथा दूसरे हाथ में कुरान लेकर इस्लाम का प्रचार किया।”

सुलेमान (9वीं सदी) के भारत आगमन के समय—
प्रतिहार शासक मिहिरभोज व पाल शासक धर्मपाल।

अलमसूदी (10वीं सदी) के भारत आगमन के समय—
धर्मपाल तथा देवपाल।

प्रतिहार शासक महिपाल व राष्ट्रकूट शासक इन्द्र तृतीय।

 

Leave a Comment